रामसर सम्मलेन
परिचय
आर्द्रभूमियों पर रामसर कन्वेंशन को वर्ष 1971 में ईरानी शहर में अपनाया गया यह एक अंतर-सरकारी संधि है। भारत द्वारा इसे 1 फरवरी, 1982 में लागू किया गया। वे आर्द्रभूमि क्षेत्र जो अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के हैं, रामसर स्थल के रूप में घोषित किये गए हैं। हाल ही में, भारत ने लद्दाख में त्सो कार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स को अपनी 42 वीं रामसर साइट के रूप में जोड़ा है, जो वेटलैंड्स पर अंतर्राष्ट्रीय रामसर कन्वेंशन द्वारा संरक्षण प्राप्त स्थिति है। प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2021 के लिये विश्व आर्द्रभूमि दिवस की थीम 'आर्द्रभूमि और जल' (Wetlands and Water) है।
आर्द्रभूमि
आर्द्रभूमि (wetland) ऐसा भूभाग होता है जहाँ के पारितंत्र का बड़ा हिस्सा स्थाई रूप से या प्रतिवर्ष किसी मौसम में जल से संतृप्त हो या उसमें डूबा रहे। ऐसे क्षेत्रों में जलीय पौधों का बाहुल्य रहता है। जैवविविधता की दृष्टि से आर्द्रभूमियाँ अंत्यंत संवेदनशील होती हैं क्योंकि विशेष प्रकार की वनस्पति व जीव ही आर्द्रभूमि पर उगने और फलने-फूलने के लिये अनुकूलित होते है । आर्द्रभूमि मानव गतिविधियों और ग्लोबल वार्मिंग के कारण जंगलों की तुलना में 3 गुना तेज़ी से समाप्त हो रही है।
भारत में आर्द्रभूमियों की स्थिति
वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 2,400 से अधिक रामसर साइटस विद्यमान हैं। भारत में लगभग 4.6% भूमि आर्द्रभूमि के रूप में है जो 15.26 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करती है। भारत में 42 रामसर स्थल हैं, जिन्हें आर्द्रभूमि के रूप में अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व (रामसर स्थल) का नामित किया गया है।
भारत में रामसर नामित आर्द्रभूमियों की सूची
- कोलेरु झील (आंध्र प्रदेश)
- दीपोर बील (असम)
- नालसरोवर पक्षी अभयारण्य (गुजरात)
- चंद्रताल वेटलैंड (हिमाचल प्रदेश)
- पौंग बांध झील (हिमाचल प्रदेश)
- रेणुका वेटलैंड (हिमाचल प्रदेश)
- होकेरा वेटलैंड (जम्मू और कश्मीर)
- सूरिंसार-मानसर झीलें (जम्मू-कश्मीर)
- त्सो-मोरीरी (लद्धाख)
- वुलर झील (जम्मू-कश्मीर)
- अष्टमुडी वेटलैंड (केरल)
- सस्थमकोट्टा झील (केरल)
- वेम्बनाड-कोल वेटलैंड( केरल)
- भोज वेटलैंड, भोपाल, ( मध्य प्रदेश)
- लोकतक झील ( मणिपुर)
- भितरकनिका मैंग्रोव (ओडिशा)
- चिलिका झील (ओडिशा)
- हरिके झील (पंजाब)
- कंजली झील (पंजाब)
- रोपड़ (पंजाब)
- सांभर झील (राजस्थान)
- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान( राजस्थान)
- प्वाइंट कैलिमेरे वन्यजीव और पक्षी अभयारण्य (तमिलनाडु)
- रुद्रसागर झील (त्रिपुरा)
- ऊपरी गंगा नदी ,ब्रजघाट से नरौरा खिंचाव (उत्तर प्रदेश)
- पूर्व कलकत्ता वेटलैंड्स (पश्चिम बंगाल)
- सुंदर वन डेल्टा (पश्चिम बंगाल)
- नंदूर मधमेश्वर ,नासिक (महाराष्ट्र)
- केशोपुर मिआनी कम्युनिटी रिजर्व ( पंजाब)
- व्यास संरक्षण रिजर्व (पंजाब)
- नांगल वन्यजीव अभयारण्य,रूपनगर ( पंजाब)
- साण्डी पक्षी अभयारण्य ,हरदोई ( उत्तर प्रदेश)
- समसपुर पक्षी अभयारण्य,रायबरेली (उत्तर प्रदेश)
- नवाबगंज पक्षी अभयारण्य, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)
- समन पक्षी अभयारण्य ,मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)
- पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य , गोंडा (उत्तर प्रदेश)
- सरसई नावर झील , इटावा (उत्तर प्रदेश)
- आसान रिजर्व
- काबर तल (बिहार)
- लोनार झील (महारष्ट्र)
- सुर सरोबर (उत्तर प्रदेश)
- त्सो कर लेक (लद्दाख)
2020 में शामिल किए गए 10 क्षेत्र
- नंदूर मधमेश्वर ,नासिक (महाराष्ट्र)
- केशोपुर मिआनी कम्युनिटी रिजर्व ( पंजाब)
- व्यास संरक्षण रिजर्व (पंजाब)
- नांगल वन्यजीव अभयारण्य,रूपनगर ( पंजाब)
- साण्डी पक्षी अभयारण्य ,हरदोई ( उत्तर प्रदेश)
- समसपुर पक्षी अभयारण्य,रायबरेली (उत्तर प्रदेश)
- नवाबगंज पक्षी अभयारण्य, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)
- समन पक्षी अभयारण्य ,मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)
- पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य , गोंडा (उत्तर प्रदेश)
- सरसई नावर झील , इटावा (उत्तर प्रदेश)
- आसान रिजर्व
- काबर तल (बिहार)
- लोनार झील (महारष्ट्र)
- सुर सरोबर (उत्तर प्रदेश)
- त्सो कर लेक (लद्दाख)
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